Wednesday, December 5, 2012

डिंपल यादव जी आपके प्रदेश में नारी का सम्मान है - डिंपल मिश्रा

 जब मैं मुंबई में थी तो सुना करती थी की उत्तरप्रदेश में अपराध का बोलबाला है, भावनाओ की कोई कीमत नहीं है, मैं भदोही आने से डर  रही थी। सोचती थी मैं अपनी बेटी के हक़ के लिए जा रही हूँ, पता नहीं मेरे साथ क्या होगा। पर मन में एक सोच यह भी थी यदि अपने मान सम्मान के लिए और नारी जाती के अधिकारों के लिए हिम्मत जूटा  रही हूँ तो लोगो का साथ अवश्य मिलेगा। मेरे फेसबुक  के साथियों ने मेरा हौसला भी बढाया था, पर सच बात तो यह थी की मन में हिचकिचाहट भी थी। फिर सोचा जब कदम बढ़ा  दिया है तो पीछे क्या हटाना, यदि अपने अधिकारों के लिए लड़ना है तो हिम्मत जुटानी ही पड़ेगी। फेसबुक के साथियों ने हौसला दिया। जब मैंने वाराणसी की धरती पर कदम रखा  तो उत्तरप्रदेश के बारे में मेरी सोच बदलनी  शुरू हो गयी। एक साधारण सी घरेलू महिला जब पहुंची तो उसका भरपूर स्वागत किया गया। मुझे पता था यह सम्मान मेरे लिए नहीं था। बल्कि मेरे मुद्दे के प्रति था। यदि अपने सम्मान की रक्षा में मेरे प्राण भी जाते है तो मुझे परवाह नहीं। भदोही के लोंगो ने मुझे अपनी बेटी और बहन के जैसा सम्मान दिया। 
लोग कहते थे की उत्तरप्रदेश में कोई सुरक्षित नहीं है। पर लोंगो ने सब गलत कहा था। एक अकेली महिला जब अपनी बच्ची को लेकर यहाँ पहुँचने के बाद सुरक्षित है और बिना भय के है तो लोग सुरक्षित क्यों नहीं है। 
मैं आपके भदोही जनपद की  कानून व्यवस्था को भी धन्यवाद देना चाहूंगी। मैंने यहाँ के जिलाधिकारी जी को सिर्फ फेसबूक के जरिये  एक सन्देश भेजा था। पर उन्होंने मेरी बात को गंभीरता से लिया। जब मैं गाँव में पहुंची तो वहा  मेरी सुरक्षा का पूरा इंतजाम था। 
सबसे बड़ी बात तो यह है की भदोही के लोंगो में भारतीय संस्कृति और सम्मान का भाव है। यहाँ के लोग अन्याय के खिलाफ बोलना जानते है। मैं लोंगो के लिए परायी थी किन्तु उनकी  अपनी बन गयी। सच कहू तो मुझे आपके प्रदेश में पहुंचते ही इंसाफ मिल गया। मैं सोचती थी की जब मेरी बेटी बड़ी होगी तो लोग उसे नाजायज़ कहेंगे। पर अब  नहीं क्योंकि गाव के लोंगो ने मुझे बहू माना। पूरे जिले ने मुझे बहू माना। फिर मेरी बेटी नाजायज कैसे। 
शायद भदोही के लोंगो में जिस तरह महिलाओ के लिए सम्मान है और लोग अन्याय के खिलाफ बोलना जानते है यदि इसी तरह देश के सभी लोग हो जाय  तो किसी भी महिला साथ अन्याय नहीं होगा। किसी की भी बहन बेटी इस तरह सडको पर भटकने को मजबूर नहीं होगी।  जिस तरह भदोही की पंचायते अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है यदि देश की सभी पंचायते जागरूक हो जाय  तो किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। 
डिम्पल जी यह लड़ाई सिर्फ मेरी नहीं बल्कि उन सभी महिलाओ की है जो अन्याय का शिकार हुयी है और न्याय पाने के लिए दर दर भटक रही है।
मैं धन्यवाद भदोही की मीडिया को भी देना चाहूंगी। एक छोटे से शहर में रहकर भी किसी बेसहारा महिला की आवाज़ पूरे देश में पहुचने का माद्दा यहाँ की मीडिया रखती है।
डिंपल जी मैं आप से मिल तो सकती नहीं पर आप अपने पति उत्तर  प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश जी को मेरी तरफ से जरूर धन्यवाद दीजियेगा की उनके प्रदेश में नारी का सम्मान है। यहाँ की पंचायते अभी भी भारतीय संस्कृतियों का सम्मान करती है।
                                                                                        आपकी ----- डिंपल मिश्रा 

6 comments:

Tarun Dubey said...

Dimple Mishra Jee

Dhanya Bad ....
Aapke is update and Blog ke liye
Esee Tarah aapnee samsya aur Dil kee bato ko express
karte rahyee..

Log Aapke Sath Hai , Rahnege

Thanx
Tarun Dubey

शालिनी कौशिक said...

dimple ji aapke bare me samacharpatron se pata chala aaj yahan aapke aalekh ko padhkar bahut achchha laga .aap apne lakshay par dati rahen sara pradesh aapke sath hai vishesh taur par uttar pradesh kee mahilayen. .शोध -माननीय कुलाधिपति जी पहले अवलोकन तो किया होता .

डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' said...

डिम्पल जी -आपने संघर्ष द्वारा अपनी पुत्री को समाज में वैध संतान का दर्जा दिलाया है .वैसे मेरा मानना है कि संतान कोई अवैध नहीं होती .आपकी पोस्ट का लिंक यहाँ भी है .देखें -डिम्पल तुम्हारे साथ पूरा हिंदुस्तान है !

Shah Nawaz said...

आपकी हिम्मत और जज्बे को सलाम डिम्पल मिश्रा जी, रब आपकी सभी कामनाएं पूरी करे!

हरीश सिंह said...

dimple tumhare upar desh ki sabhi mahilao ko garv hai

रचना said...

achchha lagaa aap ke baarey mae jaankar